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परमात्मा

श्रीमद भगवद गीता आरती

Bhagavad Gita Aarti

A devotional hymn venerating the Bhagavad Gita itself as Krishna's own sacred word.

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1

जय भगवद् गीते, माता जय भगवद् गीते। हरि हिय कमल विहारिणि सुन्दर सुपुनीते॥

2

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

3

कर्म सुमर्म प्रकाशिनि कामासक्तिहरा। तत्त्वज्ञान विकाशिनि विद्या ब्रह्म परा॥

4

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

5

निश्चल भक्ति विधायिनि निर्मल मलहारी। शरण रहस्य प्रदायिनि सब विधि सुखकारी॥

6

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

7

राग द्वेष विदारिणि कारिणि मोद सदा। भव भय हारिणि तारिणि परमानन्दप्रदा॥

8

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

9

आसुर-भाव-विनाशिनि नाशिनि तम रजनी। दैवी सद्गुण दायिनि हरि-रसिका सजनी॥

10

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

11

समता त्याग सिखावनि, हरिमुख की बानी। सकल शास्त्र की स्वामिनि, श्रुतियों की रानी॥

12

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

13

दया-सुधा बरसावनि मातु! कृपा कीजै। हरिपद प्रेम दान कर अपनो कर लीजै॥

14

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

15

जय भगवद् गीते, माता जय भगवद् गीते। हरि हिय कमल-विहारिणि सुन्दर सुपुनीते॥

16

जय भगवद् गीते, माता जय...॥

Sources