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परमात्मा

श्री चित्रगुप्त जी की आरती

Lord Chitragupta Aarti

Devotional hymn to Chitragupta, keeper of the records of every soul's deeds.

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1

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥

2

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

3

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी। भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥

4

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

5

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै। मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥

6

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

7

कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी। सृष्टि संहारण, जन दुःख हारण, प्रकट हुये स्वामी॥

8

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

9

कलम, दवात, शङ्ख, पत्रिका, कर में अति सोहै। वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मन मोहै॥

10

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

11

सिंहासन का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये। तैंतीस कोटि देवता, चरणन में धाये॥

12

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

13

नृपति सौदास, भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा। वेगि विलम्ब न लायो, इच्छित फल दीन्हा॥

14

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

15

दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वास्थ के कर्ता। जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता॥

16

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

17

बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

18

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

19

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं। चौरासी से निश्चित छूटैं, इच्छित फल पावैं॥

20

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

21

न्यायाधीश बैकुण्ठ निवासी, पाप पुण्य लिखते। हम हैं शरण तिहारी, आस न दूजी करते॥

22

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

Sources