आरती गजबदन विनायक की
Gajavadan Vinayaka Aarti
A second aarti to Lord Ganesha as Gajavadana, the elephant-faced one.
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1
आरती गजबदन विनायक की। सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥ आरती गजबदन विनायक की। सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥
2
आरती गजबदन विनायक की॥
3
एकदन्त शशिभाल गजानन, विघ्नविनाशक शुभगुण कानन। शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन, दुःखविनाशक सुखदायक की॥
4
आरती गजबदन विनायक की॥
5
ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति, विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति। अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति, विद्या-विनय-विभव-दायककी॥
6
आरती गजबदन विनायक की॥
7
पिङ्गलनयन, विशाल शुण्डधर, धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर। लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर, सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥
8
आरती गजबदन विनायक की॥
Sources
- Gajavadan Vinayaka Aarti Lyrics — DrikPanchang