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परमात्मा

गंगा माता आरती

Ganga Bhagiratha Nandini Aarti

A second aarti to Ganga, recalling her descent to earth through King Bhagiratha's penance.

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1

जय जय भगीरथनन्दिनि, मुनि-चय चकोर-चन्दिनि, नर-नाग-बिबुध-बन्दिनि, जय जह्नुबालिका।

2

जय जय भगीरथनन्दिनि...।

3

विष्णु-पद-सरोजजासि, ईस-सीस पर बिभासि, त्रिपथगासि, पुन्यरासि, पाप-छालिका॥

4

जय जय भगीरथनन्दिनि...।

5

बिमल बिपुल बहसि बारि, सीतल त्रयताप-हारि, भँवर बर बिभन्गतर तरन्ग-मालिका।

6

जय जय भगीरथनन्दिनि...।

7

पुरजन पूजोपहार सोभित ससि धवल धार, भंजन भव-भार, भक्ति-कल्प थालिका॥

8

जय जय भगीरथनन्दिनि...।

9

निज तट बासी बिहन्ग, जल-थल-चर पसु-पतन्ग, कीट, जटिल तापस, सब सरिस पालिका।

10

जय जय भगीरथनन्दिनि...।

11

तुलसी तव तीर तीर सुमिरत रघुवन्स-बीर, बिचरत मति देहि मोह-महिष-कालिका॥

12

जय जय भगीरथनन्दिनि...।