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परमात्मा

आरती श्री जगदीशजी

Om Jai Jagdish Hare

The best-known aarti of Lord Vishnu, composed by Pandit Shraddha Ram Phillauri and sung across North India.

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1

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

2

ॐ जय जगदीश हरे।

3

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

4

ॐ जय जगदीश हरे।

5

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

6

ॐ जय जगदीश हरे।

7

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

8

ॐ जय जगदीश हरे।

9

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

10

ॐ जय जगदीश हरे।

11

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

12

ॐ जय जगदीश हरे।

13

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

14

ॐ जय जगदीश हरे।

15

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

16

ॐ जय जगदीश हरे।

17

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

18

ॐ जय जगदीश हरे।

Sources