जानकी माता आरती
Janaki Mata Aarti
A second aarti to Sita, worshipped here as Janaki.
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1
आरती कीजै श्रीजनक लली की। राममधुपमन कमल कली की॥
2
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
3
रामचन्द्र, मुखचन्द्र चकोरी। अन्तर साँवर बाहर गोरी। सकल सुमन्गल सुफल फली की॥
4
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
5
पिय दृगमृग जुग-वन्धन डोरी, पीय प्रेम रस-राशि किशोरी। पिय मन गति विश्राम थली की॥
6
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
7
रूप-रास गुननिधि जग स्वामिनि, प्रेम प्रवीन राम अभिरामिनि। सरबस धन हरिचन्द अली की॥
8
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
Sources
- Janaki Mata Aarti Lyrics — DrikPanchang