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परमात्मा

आरती देवी कालरात्रि जी की

Devi Kalaratri Aarti

Devotional hymn to Kalaratri, the seventh form of Navadurga.

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1

कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुँह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचण्डी तेरा अवतारा॥

2

पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥

3

कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूँ तेरा नजारा॥ सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

4

रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिन्ता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥

5

उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली माँ जिसे बचावे॥ तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥

Sources