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परमात्मा

आरती श्री कुबेर जी की

Lord Kubera Aarti

Devotional hymn to Kubera, treasurer of the gods and lord of wealth.

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1

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे॥

2

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

3

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े। दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े॥

4

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

5

स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे। योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं॥

6

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

7

गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे। दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें॥

8

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

9

भाँति भाँति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने। मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥

10

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

11

बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे॥

12

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

13

मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले। अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले॥

14

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

15

यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे। कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

16

ॐ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

Sources