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परमात्मा

शनि देव की आरती

Shaniwar (Saturday) Shani Dev Aarti

A second, longer aarti to Shani Dev traditionally sung on Saturdays.

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1

जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा। अखिल सृष्टि में कोटि-कोटि जन करें तुम्हारी सेवा।

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जय शनि देवा...॥

3

जा पर कुपित होउ तुम स्वामी, घोर कष्ट वह पावे। धन वैभव और मान-कीर्ति, सब पलभर में मिट जावे। राजा नल को लगी शनि दशा, राजपाट हर लेवा।

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जय शनि देवा...॥

5

जा पर प्रसन्न होउ तुम स्वामी, सकल सिद्धि वह पावे। तुम्हारी कृपा रहे तो, उसको जग में कौन सतावे। ताँबा, तेल और तिल से जो, करें भक्तजन सेवा।

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जय शनि देवा...॥

7

हर शनिवार तुम्हारी, जय-जय कार जगत में होवे। कलियुग में शनिदेव महात्तम, दुःख दरिद्रता धोवे। करू आरती भक्ति भाव से भेंट चढ़ाऊं मेवा।

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जय शनि देवा...॥ </div><br><hr class="dpHorizontalLine"><h3 class="dpLyricsType ">॥ शनि देव की आरती ॥</h3><p class="dpContent"><strong>चार भुजा तहि छाजै</strong> शनि देव की एक और आरती है जिसे भक्तों द्वारा शनिवार के दिन गाया जाता है। <div class="dpLyricsAartiGroup"> चार भुजा तहि छाजै, गदा हस्त प्यारी।

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जय शनिदेव जी॥

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रवि नन्दन गज वन्दन, यम अग्रज देवा। कष्ट न सो नर पाते, करते तब सेवा॥

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जय शनिदेव जी॥

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तेज अपार तुम्हारा, स्वामी सहा नहीं जावे। तुम से विमुख जगत में, सुख नहीं पावे॥

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जय शनिदेव जी॥

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नमो नमः रविनन्दन सब ग्रह सिरताजा। बन्शीधर यश गावे रखियो प्रभु लाजा॥

15

जय शनिदेव जी॥

Sources