गोरख आरती
Shri Gorakha Aarti
Devotional hymn to the yogi Gorakhnath.
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1
जय गोरख देवा जय गोरख देवा। कर कृपा मम ऊपर नित्य करूं सेवा॥
2
शीश जटा अति सुन्दर भाल चन्द्र सोहे। कानन कुण्डल झलकत निरखत मन मोहे॥
3
गल सेली विच नाग सुशोभित तन भस्मी धारी। आदि पुरुष योगीश्वर सन्तन हितकारी॥
4
नाथ निरंजन आप ही घट-घट के वासी। करत कृपा निज जन पर मेटत यम फांसी॥
5
ऋद्धि सिद्धि चरणों में लोटत माया है दासी। आप अलख अवधूता उत्तराखण्ड वासी॥
6
अगम अगोचर अकथ अरूपी सबसे हो न्यारे। योगीजन के आप ही सदा हो रखवारे॥
7
ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा निशदिन गुण गावें। नारद शारद सुर मिल चरनन चित लावें॥
8
चारों युग में आप विराजत योगी तन धारी। सतयुग द्वापर त्रेता कलयुग भय टारी॥
9
गुरु गोरख नाथ की आरती निशदिन जो गावे। विनवत बाल त्रिलोकी मुक्ति फल पावे॥
Sources
- Shri Gorakha Aarti Lyrics — DrikPanchang