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परमात्मा

श्री परशुराम आरती

Shri Parashurama Aarti

Devotional hymn to Parashurama, the axe-wielding incarnation of Vishnu.

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1

ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी। सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी॥

2

ॐ जय परशुधारी...॥

3

जमदग्नी सुत नर-सिंह, मां रेणुका जाया। मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया॥

4

ॐ जय परशुधारी...॥

5

कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला। चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला॥

6

ॐ जय परशुधारी...॥

7

ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा बांधी। सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी॥

8

ॐ जय परशुधारी...॥

9

मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण नैना। दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना॥

10

ॐ जय परशुधारी...॥

11

कर शोभित बर परशु, निगमागम ज्ञाता। कंध चाप-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता॥

12

ॐ जय परशुधारी...॥

13

माता पिता तुम स्वामी, मीत सखा मेरे। मेरी बिरद संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे॥

14

ॐ जय परशुधारी...॥

15

अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो गावे। 'पूर्णेन्दु' शिव साखि, सुख सम्पति पावे॥

16

ॐ जय परशुधारी...॥

Sources