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परमात्मा

श्री यशोदालाल आरती

Shri Yashodalala Aarti

Devotional hymn to Krishna as Yashodalala, the darling son of Yashoda.

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1

आरति करत यसोदा प्रमुदित, फूली अङ्ग न मात। बल-बल कहि दुलरावत आनन्द मगन भई पुलकात॥

2

सुबरन-थार रत्न-दीपावलि चित्रित घृत-भीनी बात। कल सिन्दूर दूब दधि अच्छत तिलक करत बहु भाँत॥

3

अन्न चतुर्विध बिबिध भोग दुन्दुभि बाजत बहु जात। नाचत गोप कुम्कुमा छिरकत देत अखिल नगदात॥

4

बरसत कुसुम निकर-सुर-नर- मुनि व्रजजुवती मुसकात। कृष्णदास-प्रभु गिरधर को मुख निरख लजत ससि-काँत॥

Sources