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परमात्मा

आरती देवी सिद्धिदात्री जी की

Devi Siddhidatri Aarti

Devotional hymn to Siddhidatri, the ninth and final form of Navadurga.

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1

जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥ तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥

2

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥ तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है॥

3

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥ तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥

4

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया॥ सर्वसिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली॥

5

हिमाचल है पर्वत जहाँ वास तेरा। महा नन्दा मन्दिर में है वास तेरा॥ मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता॥

Sources